उत्तराखंड: क्या है ये ब्लैक फंगस, जो ले रहा लोगों की जान

फाइल फोटो

देहरादून
: प्रदेश में कोरोना से जान गंवाने वाले लोगों का आंकड़ा तो किसी से छुपा नहीं है। वहीं अब एक और घातक बीमारी अस्तित्व में आई है। जिस कारण काफी लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। इस बामारी का नाम ब्लैक फंगस है। ये मुख्यत: उन लोगों में पाई जा रही है जो करोना जैसी महामारी से जूझ के बचने में सफल हुए हैं। बता दें कि कोरोना से संक्रमित कई मरीज इस जानलेवा वायरस से बचने के बाद ब्लैक फंगस की चपेट में आ रहे हैं। ऐसे में मरीजों के साथ चिकित्सा विशेषज्ञों को दोहरी चुनौतियों से जूझना पड़ रहा है। वहीं ब्लैक फंगस से कई मरीजों की मौत हुई है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के पास इसका कोई डाटा ही नहीं है।

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जानिए क्या कहना है विशेषज्ञों का -

आरोग्यधाम अस्पताल के निदेशक एवं वरिष्ठ गैस्ट्रोसर्जन डॉ. विपुल कंडवाल ने जानकारी देते हुए बताया कि उनके अस्पताल में कोरोना संक्रमित कई मरीज ऐसे आ रहे है जो ब्लैक फंगस से भी संक्रमित हैं। ऐसे मरीजों को बचाने के लिए कोरोना की दवाओं के साथ एंटी फंगल वैक्सीन और दवाइयां दी जा रही हैं। लेकिन इसके बावजूद कई मरीजों को ब्लैक फंगस जैसी घातक बीमारी से नहीं बचाया जा सका। वहीं वरिष्ठ पल्मनोलॉजिस्ट डॉ. अंकित अग्रवाल का कहना है कि अभी तक उन्होंने जितने कोरोना संक्रमित मरीजों का इलाज किया है। उनमें से कई को ब्लैक फंगस जैसी बीमारी का भी सामना करना पड़ा है। साथ ही उन्होनें ये भी बताया कि ब्लैक फंगस की गिरफ्त में आने के बाद मरीजों की जिंदगी बचाना काफी चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. आशुतोष माथुर का भी मानना है कि मरीजों के साथ चिकित्सकों को पहले ही जानलेवा कोरोना बीमारी से जूझना पड़ रहा था, लेकिन अब ब्लैक फंगस से परिस्थितियां और जटिल हो गई हैं।

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जानिए ब्लैक फंगस पर क्या कहा विशेषज्ञों  ने-

चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार शरीर में बहुत अधिक स्टेरॉयड, एंटीबायोटिक व एंटी फंगल दबाव के होने से ब्लैक फंगस का खतरा ज्यादा हो रहा है। ब्लैक फंगस के बैक्टीरिया हवा में मौजूद हैं जो नाक के जरिए पहले फेफड़े और फिर खून के जरिए मस्तिष्क तक पहुंच रहे हैं। जो मरीजों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। डॉ. विपुल कंडवाल के मुताबिक कोरोना संक्रमित उन मरीजों के ब्लैक फंगस से संक्रमित होने का खतरा ज्यादा है जो लंबे समय तक ऑक्सीजन के सहारे आईसीयू में हैं।

क्या हैं लक्षण ब्लैक फंगस के-

  • -मरीज की नाक से काला कफ जैसा तरल पदार्थ निकलता है।
  • -आंख, नाक के पास लालिमा के साथ दर्द होता है।
  • -मरीज को सांस लेने में तकलीफ होती है।
  • -खून की उल्टी होने के साथ सिर दर्द और बुखार होता है।
  • -मरीज को चेह-मरीजों को सीने में दर्द होता है।
  • -स्थिति बेहद खराब होने की स्थिति में मरीज बेहोश हो जाता है।
  •  क्या करें क्या ना करें -
  • -ऑक्सीजन मास्क की सफाई और पानी बदलते रहें। 
  • चिकित्सा विशेषज्ञों के मुताबिक कोरोना संक्रमित मरीजों को ब्लैक फंगस से बचाया जा सके। इसके लिए आईसीयू में भर्ती मरीजों व घरों में आइसोलेट मरीजों के ऑक्सीजन मास्क के समय समय पर सफाई करने के साथ ही फ्लोमीटर के साथ लगे बोतल के पानी को नियमित अंतराल पर बदलें।
  • - पानी की जगह डिस्टिल्ड वाटर का इस्तेमाल किया जाए।
  •  मरीजों के साथ ही सामान्य लोग भी अत्यधिक स्टेरॉयड के इस्तेमाल से बचें। अत्यधिक शुगर लेवल वाले मरीजों को ब्लैक फंगस का खतरा ज्यादा है।वरिष्ठ पल्मोलॉजिस्ट डॉ. अंकित अग्रवाल के मुताबिक यदि किसी व्यक्ति का शुगर लेवल बहुत अधिक है तो ऐसे लोगों के ब्लैक फंगस से संकलित हो जाने का खतरा ज्यादा रहता है। साथ ही कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले मरीजों पर ब्लैक फंगस तेजी से हमला करता है।
  • -  ब्लैक फंगस से बचने के लिए लोगों को अपने शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को विकसित करना होगा। इसके लिए लोगों प्राणायाम व्यायाम करने के साथ-साथ खानपान पर ध्यान देना होगा।

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