उत्तराखंड: शमशान में आए इतने शव कि गिनती भूली सरकार! बाल आयोग ने पूछा- कितने हुए अनाथ

फाइल फोटो: चिताओं से पटे पड़े शमशान



देहरादून:
उत्तराखंड में पिछले 12 दिनों में 4197 लोगों का अंतिम संस्कार हुआ है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इसमें 1523 कोरोना से मृत हुए लोगों के हैं. नोडल अधिकारी विनोद कुमार सिंह ने बताये कि प्रदेश के 91 निकायों में 295 कब्रिस्तान और शमशानघाट हैं. जिनमें प्रतिदिन 1531 शवों के अंतिम संस्कार कि व्यवस्था है. 20 अप्रैल से एक मई तक 1348 और दो मई को 175 लोगों का अंतिम संस्कार कोविड से संबंधित श्मशान घाट या कब्रिस्तानों में किया गया। यानी 12 दिन में 1523 लोगों का अंतिम संस्कार किया  गया

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कोविड कर लिए आरक्षित घाटों पर सामान्य शवों के अंतिम संस्कार के कारण स्पष्ट आंकडें  जुटाने में  असमर्थ: 

कोविड शवों के लिए आरक्षित घाटों पर सामान्य बीमारी से मृत मरीजो का अंतिम संस्कार भी किया जा रहा है, जिससे पुख्ता आंकडें जुटाने में समस्या पैदा हो रही है. एक मई को कुल 130 टन लकड़ी का प्रयोग शमशान घाट में किया गया और करीब 530 टन लकड़ी उपलब्ध  है.

कोरोना महामारी से अनाथ हुए बच्चों का आंकड़ा उपलब्ध  कराए सरकार: बाल संरक्षण अधिकार आयोग

कोरोना के चलते अनाथ हुए बच्चों की सूचना उपलब्ध कराए सरकार: उत्तराखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने प्रदेश सरकार से ऐसे बच्चों की सूचना उपलब्ध कराने को कहा है. जिनके अभिभावकों की कोविड संक्रमण के चलते मौत हो गई है. आयोग की अध्यक्ष ऊषा नेगी ने कहा कि ऐसे बालक जिनके माता-पिता दोनों की कोरोना की वजह से मौत हो गई है या वे अस्पताल में भर्ती हैं  उनकी सूचना जिला बाल कल्याण समिति एवं बाल आयोग को उपलब्ध कराई जाए.

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 इसके अलावा बाल संरक्षण गृहों में आने वाले नए बच्चों के लिए अलग से एक कमरा आइसोलेशन के लिए आरक्षित किया जाए. बाल संरक्षण गृहों में एक ऑक्सीजन सिलिंडर और 10 कोरोना किट उपलब्ध भी कराए जाएं. जबकि संक्रमित बच्चों के लिए कोविड अस्पतालों में चाइल्ड वार्ड की व्यवस्था की जाए.

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