उत्तराखंड: उपचार के संसाधन पर्याप्त नहीं और सीएम के बडबोले बोल

फाइल फोटो
देहरादून: उत्तराखंड की तीरथ सिंह की सरकार एक ओर तो यह बोल रही है कि प्रदेश में ऑक्सीजन की कमी नहीं हैं, बल्कि अस्पतालों के बढ़ने से ऑक्सीजन बेड्स में बढ़ोतरी हो रही है।  जिसके कारण ऑक्सीजन की खपत बढ़ रही है।  वहीं दूसरी ओर इस बात की सच्चाई कोरोना काल में उपलब्ध संसाधनों की कमी और बाकी की तैयारियां बता रही है। 

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आपको बता दें कि प्रदेश में लगातार कोरोना संक्रमण बढ़ने से आक्सीजन और आइसीयू बेड की काफी कमी हो रही है।  जिसके कारण कई मरीज अपनी जान गंवा चुके हैं।  प्राप्त डाटा के अनुसार प्रदेश में कोरेाना संक्रमण की दूसरी लहर के बीच पॉजिटिव रेट 62.5 फीसद चल रहा है, जो कि प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है।  साथ ही तीरथ सिंह सरकार के लिए चुनौती  भी बनती जा रही है।  

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इस संक्रमण को लेकर अभी तक जो अध्ययन हुआ है उससे यह बात सामने आई है कुल एक्टिव केस में 17 फीसद को आक्सीजन बेड और तीन प्रतिशत को आइसीयू की जरूरत पड़ती है। इस लिहाज में प्रदेश को मौजूदा एक्टिव केस के हिसाब से 12900 आक्सीजन बेड और 2280 आइसीयू चाहिए, लेकिन प्रदेश में इस वक्त 5500 आक्सीजन बेड, 1390 आइसीयू और 876 वेंटिलेटर ही है।  इन सब में केवल यही अच्छी बात है कि प्रदेश में अधिकांश मरीज होम आसइसोलेशन में हैं और जरूरत पड़ने पर घर में ही आक्सीजन ले रहे हैं। 

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सचिव स्वास्थ्य अमित नेगी का कहना है कि प्रदेश में अभी तक आक्सीजन बेड की कमी महसूस हो रही थी लेकिन अब यह काफी कम हुई है। यह बात जरूर है कि आइसीयू बेड के मामले में अभी थोड़ी स्थिति विकट है। नए आक्सीजन व आइसीयू बेड बढ़ाने पर काम चल रहा है। उम्मीद है कि व्यवस्था जल्द दुरुस्त हो जाएगी।

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